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पहिली ते दहावी संपूर्ण अभ्यास

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मंगळवार, २७ ऑक्टोबर, २०२६

रेलवे स्टेशन पर आधा घंटा निबंध

रेलवे स्टेशन पर आधा घंटा निबंध | हिंदी निबंध | विद्यार्थियों के लिए

रेलवे स्टेशन पर आधा घंटा | हिंदी निबंध

रेलवे स्टेशन एक सार्वजनिक स्थान है। यहाँ हमेशा चहल-पहल रहती है। यात्रियों का आना-जाना, कुलियों की भाग-दौड़, टिकट खिड़की पर लगी लंबी कतारें और रेलगाड़ियों की आवाजाही रेलवे स्टेशन के वातावरण को बहुत व्यस्त बना देती हैं।

रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की भीड़

पिछली तेईस मार्च को मुझे कर्णावती एक्सप्रेस से अहमदाबाद जाना था। मैंने अपना टिकट पहले ही आरक्षित करा लिया था। स्टेशन पहुँचने पर पता चला कि गाड़ी आधा घंटा देर से छूटेगी।

स्टेशन के परिसर में बड़ी हलचल थी। कारों, टैक्सियों और रिक्शों से यात्री आ रहे थे। वाहनों के पहुँचते ही लाल कुर्ते पहने कुली उनकी ओर दौड़ पड़ते। किराया तय करके वे यात्रियों का सामान उठाकर प्लेटफार्म की तरफ चल पड़ते।

टिकट घर की खिड़कियों के सामने लोगों की लंबी कतारें लगी थीं। कुछ लोग कतार के बीच में घुसने की कोशिश कर रहे थे। उनकी इस हरकत पर पीछे खड़े लोग चिल्लाए। शोर सुनकर पुलिस आ गई और उन लोगों को पकड़कर एक ओर ले गई। प्लेटफार्म टिकट के लिए भी लंबी कतार लगी हुई थी।

रेलवे स्टेशन का दृश्य

प्लेटफार्म पर पुरुष, स्त्रियाँ और बच्चे सभी तरह के लोग थे। कुछ लोगों की वेशभूषा से ही पता चल रहा था कि वे किस प्रांत के रहने वाले हैं।

बुक स्टॉल पर काफी लोग खड़े थे। कोई अखबार खरीद रहा था, तो कोई साप्ताहिक या मासिक पत्रिका। कुछ लोग 'किशोर', 'चंदामामा', 'जगमग' और 'टारगेट' जैसी पत्रिकाएँ खरीद रहे थे।

'रेल आहार' के स्टॉलों पर लोग आलूबड़ा, समोसा, पेटिस और कचौड़ी जैसे खाद्य पदार्थ खरीद रहे थे। थम्सअप, कोकाकोला, पेप्सी तथा आइसक्रीम की भी बड़ी माँग थी। कुछ लोग गरमा-गरम चाय की चुस्कियाँ ले रहे थे। खिलौनों के स्टॉल पर माता-पिता अपने बच्चों को खिलौने दिला रहे थे। कई यात्री प्याऊ पर पानी पी रहे थे। कुली छोटी-छोटी हाथगाड़ियों पर सामान ढोने में व्यस्त थे।

रेलगाड़ी का आगमन

इसी समय बाहर से आई एक यात्री गाड़ी स्टेशन पर रुकी। यात्रियों का सामान उतारने के लिए कुली दौड़ पड़े। बहुत से यात्री स्वयं अपना सामान लेकर नीचे उतरने लगे। जो लोग अपने प्रियजनों को लेने आए थे, वे उन्हें लेकर बाहर निकलने लगे। फाटक पर खड़े टी.सी. बाहर निकल रहे यात्रियों से टिकट एकत्र करने लगे।

इसी बीच हमारी गाड़ी प्लेटफार्म पर आ लगी। उसका इंतजार कर रहे यात्रियों में हलचल मच गई। गाड़ी में जगह पाने के लिए कुछ कुली और यात्री चलती हुई गाड़ी में चढ़ने लगे। सामान अंदर ढकेला जाने लगा। डिब्बों से झगड़ने की तेज आवाजें आने लगीं। छोटे बच्चे चिल्ला रहे थे। कोई किसी की बात नहीं सुन रहा था। आरक्षित डिब्बों में भी शोरगुल मचा हुआ था।

रेलगाड़ी का प्रस्थान

कुछ ही देर में यात्री अपनी-अपनी जगह बैठ गए। कुछ देर पहले झगड़ने वाले लोग अब मित्रों जैसा व्यवहार करने लगे। विदा करने आए लोग बाहर से अंदर बैठे यात्रियों को सलाह और सूचनाएँ देने लगे।

इतने में गार्ड ने सीटी दी। 'शुभ यात्रा', 'गुड बाय' और 'पहुँचते ही फोन करना' जैसे शब्दों से प्लेटफार्म गूँज उठा। लोग हाथ हिलाकर अपने प्रियजनों को विदा देने लगे।

मैं झटपट अपनी आरक्षित सीट पर जाकर बैठ गया। पलभर में हमारी गाड़ी स्टेशन से बाहर आ गई। मैंने खिड़की से पीछे देखा। बहुत-से हाथ अब भी हिल रहे थे।

निष्कर्ष

इस प्रकार रेलवे स्टेशन पर बिताए गए आधे घंटे में मैंने अनेक प्रकार के दृश्य देखे। रेलवे स्टेशन पर खुशी, उत्साह, व्यस्तता और बिछड़ने की उदासी, सभी भाव एक साथ दिखाई देते हैं। सचमुच, रेलवे स्टेशन का दृश्य अपने आप में अनोखा होता है।


  





अनु क्र



वर्ग 1 ली ते 10 वी

संपूर्ण अभ्यास लिंक
1
पहिली
2
दुसरी
3
तिसरी
4
चौथी
5
पाचवी
6
सहावी
7
सातवी
8
आठवी
9
नववी
10
दहावी




11
नवोदय सराव
12
पाचवी शिष्यवृत्ती
13
आठवी शिष्यवृत्ती
14
१ली ते ८वी नोंदी
15
निबंध
16
भाषणसंग्रह
17
बोधकथा
18
नमुना प्रश्नपत्रिका
19
1ली ते 8 वी प्रकल्प
20
सामान्य ज्ञान
21
सामान्यज्ञान प्रश्नावली
22
English grammar
23
Moral stories
24
Essay
25
Multiplication table 2 to 30
26
पाढे २ ते १०




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