Godavari Tambekar

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पहिली ते दहावी संपूर्ण अभ्यास

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बुधवार, १४ ऑक्टोबर, २०२६

ऑक्टोबर १४, २०२६

ऐ मेरे वतन के लोगों

 ऐ मेरेवतन के लोगों

 ऐ मेरे वतन के लोगों,

तुम खूब लगा लो नारा,

ये शुभ दिन है हम सबका,

लहरा लो तिरंगा प्यारा।

 

पर मत भूलो सीमा पर

वीरों ने हैं प्राण गँवाए,

कुछ याद उन्हें भी कर लो,

जो लौट के घर न आए।

 

ऐ मेरे वतन के लोगों,

ज़रा आँख में भर लो पानी,

जो शहीद हुए हैं उनकी,

ज़रा याद करो कुर्बानी।

 

तुम भूल न जाओ उनको

इसलिए सुनो ये कहानी।

जो शहीद हुए हैं उनकी,

ज़रा याद करो कुर्बानी ।

 

जब घायल हुआ हिमालय,

ख़तरे में पड़ी आज़ादी,

जब तक थी साँस लड़े वो,

फिर अपनी लाश बिछा दी।

संगीन  पे धर कर माथा

सो गए अमर बलिदानी।

जो शहीद हुए हैं उनकी,

ज़रा याद करो कुर्बानी ।

 

जब देश में थी दिवाली,

वो खेल रहे थे होली,

जब हम बैठे थे घरों में,

वो झेल रहे थे गोली।

थे धन्य जवान वो अपने,

थी धन्य वो उनकी जवानी।

जो शहीद हुए हैं उनकी,

ज़रा याद करो कुर्बानी ।

 

कोई सिख, कोई जाट, मराठा,

कोई गुरखा, कोई मदरासी,

सरहद पर मरने वाला

हर वीर था भारतवासी।

जो ख़ून गिरा पर्वत पर,

वो ख़ून था हिन्दुस्तानी

जो शहीद हुए हैं उनकी,

ज़रा याद करो कुर्बानी।

थी ख़ून से लथपथ काया,

फिर भी बंदूक उठा के,

दस-दस को एक ने मारा,

फिर गिर गए होश गँवा के ।

जब अंत समय आया तो

कह गए कि अब मरते हैं,

खुश रहना देश के प्यारों,

अब हम तो सफ़र करते हैं।

क्या लोग थे वो दीवाने,

क्या लोग थे वो अभिमानी।

जो शहीद हुए हैं उनकी,

ज़रा याद करो कुर्बानी ।

 

तुम भूल न जाओ उनको

इसलिए कही ये कहानी

जो शहीद हुए हैं उनकी,

ज़रा याद करो कुर्बानी।

 

जय हिंद, जय हिंद की सेना |

जय हिंद, जय हिंद की सेना |

जय हिंद, जय हिंद, जय हिंद।

ऑक्टोबर १४, २०२६

ये देश है वीर जवानों का

              ये देश है वीर जवानों का


ये देश है वीर जवानों का,

अलबेलों का मस्तानों का,

इस देश का यारों क्या कहना,

ये देश है दुनिया का गहना।

 

यहाँ चौड़ी छाती वीरों की,

यहाँ भोली शक्लें हीरों की,

यहाँ गाते हैं राँझे मस्ती में,

मस्ती में झूमें बस्ती में ।

 

पेड़ों पे बहारें झूलों की,

राहों में कतारें फूलों की,

यहाँ हँसता है सावन बालों में,

खिलती हैं कलियाँ गालों में ।

 

कहीं दंगल शोख जवानों के,

कहीं करतब तीर-कमानों के,

यहाँ नित-नित मेले सजते हैं,

नित ढोल और ताशे बजते हैं।

 

दिलबर के लिये दिलदार हैं हम,

दुश्मन के लिये तलवार हैं हम,

मैदाँ में अगर हम डट जाएँ,

मुश्किल है कि पीछे हट जाएँ ।

 

 

 

ऑक्टोबर १४, २०२६

ऐ मेरे प्यारे वतन

                    ऐ मेरे प्यारे वतन

 


ऐ मेरे प्यारे वतन, ऐ मेरे बिछड़े चमन, तुझ पे दिल कुर्बान ।

तू ही मेरी आरज़ू, तू ही मेरी आबरू , तू ही मेरी जान ।

 

तेरे दामन  से जो आए, उन हवाओं को सलाम,

चूम लूँ मैं उस ज़ुबाँ को, जिस पे आये तेरा नाम ।

सब से प्यारी सुबह तेरी, सब से रंगीं तेरी शाम, तुझ पे दिल कुर्बान ।

तू ही मेरी आरज़ू, तू ही मेरी आबरू, तू ही मेरी जान ।

 

माँ का दिल बन के कभी सीने से लग जाता है तू,

और कभी नन्हीं सी बेटी बन के याद आता है तू।

जितना याद आता है मुझको, उतना तड़पाता है तू, तुझ पे दिल कुर्बान ।

तू ही मेरी आरज़ू, तू ही मेरी आबरू, तू ही मेरी जान ।

 

छोड़ कर तेरी ज़मीं को दूर आ पहुँचे हैं हम,

फिर भी है ये ही तमन्ना,तेरे जर्रों की कसम,

हम जहाँ पैदा हुए, उस जगह ही निकले दम, तुझ पे दिल कुर्बान ।

तू ही मेरी आरज़ू, तू ही मेरी आबरू, तू ही मेरी जान ।

 

सोमवार, २९ डिसेंबर, २०२५

डिसेंबर २९, २०२५

वतन की राह में वतन के नौजवाँ शहीद हो

 

                                  वतन की राह में वतन के नौजवाँ शहीद हो

वतन की राह में वतन के नौजवाँ शहीद हो ।

पुकारते हैं ये ज़मीन-ओ-आसमाँ शहीद हो ।

शहीद तेरी मौत ही तेरे वतन की जिंदगी,

तेरे लहू से जाग उठेगी इस चमन की ज़िंदगी,

खिलेंगे फूल उस जगह पे तू जहाँ शहीद हो,

वतन की राह में वतन के नौजवाँ शहीद हो ।

गुलाम उठ वतन के दुश्मनों से इंतक़ाम ले,

इन अपने दोनों बाज़ुओं से खंजरों का काम ले,

चमन के वास्ते चमन के बाग़बाँ शहीद हो,

वतन की राह में वतन के नौजवाँ शहीद हो ।

पहाड़ तक भी काँपने लगें तेरे जुनून से,

तू आसमाँ पे इन्क़लाब लिख दे अपने ख़ून से,

ज़मीं नहीं तेरा वतन है आसमाँ शहीद हो,

वतन की राह में वतन के नौजवाँ शहीद हो ।

वतन की लाज जिसको थी अज़ीज़ अपनी जान से,

वो नौजवान जा रहा है आज कितनी शान से,

इस एक जवाँ की खाक़ पर हर एक जवाँ शहीद हो,

वतन की राह में वतन के नौजवाँ शहीद हो ।

 

डिसेंबर २९, २०२५

दे दी हमें आज़ादी बिना खड्ग बिना ढाल

 

                                   दे दी हमें आज़ादी बिना खड्ग बिना ढाल

दे दी हमें आज़ादी बिना खड्ग बिना ढाल,

साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल |

आँधी में भी जलती रही गाँधी तेरी मशाल,

साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल |

 

धरती पे लड़ी तूने अजब ढब की लड़ाई,

दाग़ी न कहीं तोप न बंदूक चलाई,

दुश्मन के किले पर भी न की तूने चढ़ाई,

वाह रे फ़कीर ख़ूब करामात दिखाई।

चुटकी में दुश्मनों को दिया देश से निकाल,

साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल |

दे दी हमें आज़ादी बिना खड्ग बिना ढाल,

साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल |

रघुपति राघव राजा राम ।

 

शतरंज बिछा कर यहाँ बैठा था ज़माना,

लगता था कि मुश्किल है फ़िरंगी को हराना,

टक्कर थी बड़े ज़ोर की दुश्मन भी था ताना,

पर तू भी था बापू बड़ा उस्ताद पुराना ।

मारा वो कस के दाँव कि उलटी सभी की चाल,

साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल |

दे दी हमें आज़ादी बिना खड्ग बिना ढाल,

साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल |

रघुपति राघव राजा राम ।।

 

जब जब तेरा बिगुल बजा जवान चल पड़े,

मज़दूर चल पड़े थे और किसान चल पड़े,

हिंदू व मुसलमान, सिख, पठान चल पड़े,

कदमों पे तेरे कोटि कोटि प्राण चल पड़े।

फूलों की सेज छोड़ के दौड़े जवाहरलाल,

साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल |

दे दी हमें आज़ादी बिना खड्ग बिना ढाल,

साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल |

रघुपति राघव राजा राम ।

 

मन में थी अहिंसा की लगन तन पे लंगोटी,

लाखों में घूमता था लिये सत्य की सोंटी,

वैसे तो देखने में थी हस्ती तेरी छोटी,

लेकिन तुझे झुकती थी हिमालय की भी चोटी।

दुनिया में तू बेजोड़ था इन्सान बेमिसाल,

साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल |

दे दी हमें आज़ादी बिना खड्ग बिना ढाल,

साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल |

रघुपति राघव राजा राम ।

 

जग में कोई जिया है तो बापू तू ही जिया,

तूने वतन की राह पे सब कुछ लुटा दिया,

माँगा न कोई तख्त न तो ताज ही लिया,

अमृत दिया तो ठीक मगर खुद ज़हर पिया।

जिस दिन तेरी चिता जली, रोया था महाकाल,

साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल |

दे दी हमें आज़ादी बिना खड्ग बिना ढाल,

साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल |

रघुपति राघव राजा राम।